विदेशी भाषा के शब्द, उसके भाव तथा दृष्टांत हमारे हृदय पर वह प्रभाव नहीं डाल सकते जो मातृभाषा के चिरपरिचित तथा हृदयग्राही वाक्य। - मन्नन द्विवेदी।
 

दीदी को बतलाऊंगी मैं | बाल कविता

 (बाल-साहित्य ) 
 
रचनाकार:

 दिविक रमेश

बड़ी हो गई अब यह छोड़ो
नानी गाय, कबूतर उल्लू
अरे चलाती मैं कम्प्यूटर
मत कहना अब मुझको लल्लू ।

छोटे स्कूल नहीं  अब जाना
बड़े स्कूल अब जाऊंगी मैं
पापा-मम्मी नहीं रोकना
साइकिल भी चलाऊंगी मैं ।

बड़ा मज़ा आएगा 'वाव'
पानी-पूरी खाऊंगी मैं
नहीं लगेगी अब तो मिर्ची
दीदी को बतलाऊंगी मैं । 

-दिविक रमेश
[छुट्कल मुट्कल बाल कविताएं]

[Children's Hindi Poems by Divik Ramesh]

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