भाषा विचार की पोशाक है। - डॉ. जानसन।
 

झूठों ने झूठों से

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 राहत इंदौरी

झूठों ने झूठों से कहा है सच बोलो
सरकारी ऐलान हुआ है सच बोलो

घर के अंदर झूठों की एक मंडी है
दरवाजे पर लिखा हुआ है सच बोलो

गुलदस्ते पर यकजहती* लिख रखा है
गुलदस्ते के अंदर क्या है सच बोलो

गंगा मैया डूबने वाले अपने थे
नाव में किसने छेद किया है सच बोलो

- राहत इंदौरी


*यकजहती = एकता

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