भाषा विचार की पोशाक है। - डॉ. जानसन।
 

भारत की जय | कविता

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 चंद्रधर शर्मा गुलेरी | Chandradhar Sharma Guleri

हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, क्रिस्ती, मुसलमान
पारसीक, यहूदी और ब्राह्मन
भारत के सब पुत्र, परस्पर रहो मित्र
रखो चित्ते गणना सामान
मिलो सब भारत संतान
एक तन एक प्राण
गाओ भारत का यशोगान

--चंद्रधर शर्मा गुलेरी

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