यदि पक्षपात की दृष्टि से न देखा जाये तो उर्दू भी हिंदी का ही एक रूप है। - शिवनंदन सहाय।
एक ऐसी भी घड़ी आती है | ग़ज़ल (काव्य)    Print  
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड
 

एक ऐसी भी घड़ी आती है
जिस्म से रूह बिछुड़ जाती है

अब यहाँ कैसे रोशनी होती
ना कोई दीया, न कोई बाती है

हो लिखी जिनके मुकद्दर में ख़िज़ाँ
कोई रितु उन्हें ना भाती है

ना कोई रूत ना भाये है मौसम
चांदनी रात दिल दुखाती है

एक अर्से से खुद में खोए हो
याद किसकी तुम्हें सताती है

रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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Posted By Krishna Mohan   on Saturday, 16-Feb-2013-07:17
कृपया मुझे भारत के बारे में और जानकारी प्रदान कीजिये मैं आपका बहुत बहुत आभारी रहूँगा!!!!!!!
 
 
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