भारतीय एकता के लक्ष्य का साधन हिंदी भाषा का प्रचार है। - टी. माधवराव।
पहचान | लघु-कथा (कथा-कहानी)    Print  
Author:कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' | Kanhaiyalal Mishra 'Prabhakar'
 

'मैं अपना काम ठीक-ठाक करुंगा और उसका पूरा-पूरा फल पाऊंगा!'  यह एक ने कहा।

'मैं अपना काम ठीक-ठाक करुंगा और निश्चय ही भगवान उसका पूरा फल मुझे देंगे!'  यह दूसरे ने कहा।

'मैं अपना काम ठीक करुंगा। फल के बारे में सोचना मेरा काम नहीं।'  यह तीसरे ने कहा।

'मैं काम-काज और फल, दोनों के झमेले में नहीं पड़ता। जो होता है, सब ठीक है। जो होगा सब ठीक होगा।'  यह चौथे ने कहा।

आकाश सबकी सुन रहा था।  उसने कहा, 'पहला गृहस्थ है, दूसरा भक्त है, तीसरा ज्ञानी है, पर चौथा परमहंस है या अहदी (आलसी); यह मैं कह नहीं सकता!'

- कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर

#

Short Stories by Kanhaiyalal Mishra Prabhakar
कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर की लघु-कथाएं

Back
 
 
Post Comment
 
  Captcha
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश