इस विशाल प्रदेश के हर भाग में शिक्षित-अशिक्षित, नागरिक और ग्रामीण सभी हिंदी को समझते हैं। - राहुल सांकृत्यायन।
काश! मुझे कविता आती (काव्य)    Print  
Author:आशीष मिश्रा | इंग्लैंड
 

काश! मुझे कविता आती
                लिख देता उनको पुस्तक-सा
  प्रेम भरा दोहा लिखता 
                लिख देता उनको मुक्तक-सा।

  काश! मुझे कविता आती
                 कनखी भरता हर शब्दों में
  हृदय धड़कता रख देता
                 लिख देता बिखरे पन्नों में।

  काश! मुझे कविता आती
                 अक्षर अक्षर सपना बोता
   एक मिलन की उत्सुकता को 
                लिख कर कहता कैसा होता।

  काश! मुझे कविता आती
                   हर पंक्ति होती उपहार 
  अर्पित बंध फूल-सा देता
                लिख देता उनको हर बार।
                 
  काश! मुझे कविता आती
               आँचल  भर-भर  छंद  बनाता
  हर पल उनको ही गाता
              लिखता फिर फिर अंत ना आता
  काश! मुझे कविता आती

                                -आशीष मिश्रा, इंग्लैंड

Back
 
 
Post Comment
 
  Captcha
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश