यदि पक्षपात की दृष्टि से न देखा जाये तो उर्दू भी हिंदी का ही एक रूप है। - शिवनंदन सहाय।
गांव पर हाइकु  (काव्य)    Print  
Author:डॉ रामनिवास मानव | Dr Ramniwas Manav
 

डॉ. 'मानव' हाइकु, दोहा, बालकाव्य तथा लघुकथा विधाओं के सुपरिचित राष्ट्रीय हस्ताक्षर हैं तथा विभिन्न विधाओं में लेखन करते हैं। गांव पर लिखे उनके कुछ हाइकु यहाँ दिए जा रहे हैं:


दूध न पानी,
आज हर गांव की
यही कहानी

#

आज किसान
सबका अन्नदाता
है परेशान।

#

पीपल-नीम :
हैं गंवई--गांव के
सस्ते हकीम।

#

रामसिंगारु
करे काम न धंधा
चाहिए दारु।

-डॉ रामनिवास मानव

 

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