मैं दुनिया की सब भाषाओं की इज्जत करता हूँ, परन्तु मेरे देश में हिंदी की इज्जत न हो, यह मैं नहीं सह सकता। - विनोबा भावे।

कलयुग | मुक्तक

कलयुग | मुक्तक | Hindi Muktak by Rohit Kumar Happy

कलयुग में पाई है बस यही शिक्षा
हर बात पर मांगें हैं अग्नि-परीक्षा
बुद्ध भी अगर आज उतरें धरा पर
मांगे ना देगा उन्हें कोई भिक्षा।

-रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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