साहित्य का स्रोत जनता का जीवन है। - गणेशशंकर विद्यार्थी।
तंत्र (काव्य)    Print  
Author:गोरख पाण्डेय
 

राजा बोला रात है,
रानी बोली रात है,
मंत्री बोला रात है,
संतरी बोला रात है,
--यह सुबह-सुबह की
बात है।

-गोरख पाण्डेय

 

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