यदि पक्षपात की दृष्टि से न देखा जाये तो उर्दू भी हिंदी का ही एक रूप है। - शिवनंदन सहाय।
आज के हाइकु (काव्य)    Print  
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड
 

भूख-गरीबी
करा देती है दूर
बड़े करीबी।

#

औढ़ू, बिछाऊं
भाषण तुम्हारा ये
किसे खिलाऊँ?

#

सेवक भाई!
भाषण देता नहीं,
रोटी-कपड़ा!

#

जाने दे यार
देखा है हमने भी
नेताई प्यार।

#

सुनाता है तू
भूखे को कोई राग
दे रोटी-साग!

#

सपने अच्छे हैं
लेने-देने को पर...
पेट भरेंगे?

#

भाषण, नारे
और कुछ जलसे
क्या करते हैं?
 
#

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

Back
 
 
Post Comment
 
  Captcha
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश