यह संदेह निर्मूल है कि हिंदीवाले उर्दू का नाश चाहते हैं। - राजेन्द्र प्रसाद।

 न्यूजीलैंड की भारतीय पत्रकारिता

न्यूजीलैंड की भारतीय पत्रकारिता की कहानी - 1921 में न्यूज़ीलैंड में पहला मासिक समाचार पत्र ‘आर्योदय’ आरंभ हुआ। यह गुजराती भाषा में था। उस समय एक समाचार पत्र के प्रकाशन के बारे में सोचना सचमुच बहुत साहस का काम था। वे इसे जिलेटिन और कॉपी करने की स्याही (‘कॉपी इंक) का उपयोग करके क्रूड डुप्लीकेटर पर प्रिंट करते थे। न्यूजीलैंड में भारतीय पत्रकारिता का इतिहास एक सदी पुराना है। भारतीय पत्रकारिता 20वीं सदी से न्यूज़ीलैंड में सक्रिय है। यह 1921 में गुजराती मासिक ‘आर्योदय’ से आरंभ हुई। न्यूजीलैंड के इस पहले मासिक 'आर्योदय' के संपादक जे.के. नेताली और उप-संपादक, पी.वी. पटेल थे। न्यूजीलैंड भारतीय पत्रकारिता में हिंदी प्रकाशन का अध्याय आंशिक रूप से ‘द इंडियन टाइम्स’ में 1992 में हस्तलिखित हिंदी रिपोर्टों के प्रकाशन से आरम्भ हुआ। 1996 में भारत-दर्शन का पहला मुद्रित अँक आया और न्यूज़ीलैंड की हिंदी पत्रकारिता का नया अध्याय आरंभ हुआ। 1997 में 'भारत-दर्शन' का इंटरनेट संस्करण प्रकाशित हुआ तो इस पत्रिका ने 'इंटरनेट पर विश्व का पहला हिंदी प्रकाशन’ होने का गौरव प्राप्त किया। वर्तमान में ‘भारत-दर्शन’ सर्वाधिक पढ़े जाने वाली ऑनलाइन हिंदी साहित्यिक पत्रिका है। न्यूजीलैंड में अनेक भारतीय पत्र-पत्रिकाएँ प्रकाशित हो रही हैं और 1921 में आरंभ हुई पत्रकारिता की मशाल को थामे, आगे बढ़ रही हैं।

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