हिंदुस्तान की भाषा हिंदी है और उसका दृश्यरूप या उसकी लिपि सर्वगुणकारी नागरी ही है। - गोपाललाल खत्री।

राम, तुम्हारा नाम

 (काव्य) 
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रचनाकार:

 रामधारी सिंह दिनकर | Ramdhari Singh Dinkar

राम, तुम्हारा नाम कण्ठ में रहे, 
हृदय, जो कुछ भेजो, वह सहे, 
दुःख से त्राण नहीं माँगूँ।

माँगें केवल शक्ति दुःख सहने की, 
दुर्दिन को भी मान तुम्हारी दया 
अकातर ध्यानमग्न रहने की।

देख तुम्हारे मृत्यु-दूत को डरूँ नहीं, 
न्योछावर होने में दुविधा करूँ नहीं।

तुम चाहो, दूँ वही, 
कृपण हो प्राण नहीं माँगें।

- रामधारीसिंह दिनकर

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