हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्र निर्माण का प्रश्न है। - बाबूराम सक्सेना

धूप से छाँव की.. | ग़ज़ल

 (काव्य) 
Print this  
रचनाकार:

 कुँअर बेचैन

धूप से छाँव की कहानी लिख
आह से आँसुओं की बानी लिख

यह करिश्मा भी कर मुहब्बत में
आग से कागजों में पानी लिख

माँगने वाला कुछ तो देता है
तू सभी याचकों को दानी लिख़

मौत का हाथ थामकर उससे
यह भी कह जिंदगी के मानी लिख

दर्द जब तेरे दिल का राजा है
प्रीति को दिल की राजधानी लिख

-कुँअर बेचैन

Back
 
Post Comment
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश