देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
चिड़िया रानी
सदा फुदकती, कभी न थकती,
गाती मीठी-मीठी बानी।
कैसे खुश रहती हो इतना,
सच-सच कहना चिड़िया रानी।
ताज़ा दाना, निर्मल पानी,
शुद्ध हवा औ' धूप सुहानी।
यही राज सारी खुशियों का,
बोली हंसकर चिड़िया रानी।
खुले जगत् में जीना सीखो,
ताज़ा हो सब दानी-पानी।
इतना कहकर, फुदक ज़रा-सा,
फुर्र हो गई चिड़िया रानी।
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