अपनी सरलता के कारण हिंदी प्रवासी भाइयों की स्वत: राष्ट्रभाषा हो गई। - भवानीदयाल संन्यासी।
माली की सीख (कथा-कहानी)    Print  
Author:भारत-दर्शन संकलन | Collections
 

छह-सात वर्ष का एक बालक अपने साथियों के साथ एक बगीचे में फूल तोड़ने के लिए गया। तभी बगीचे का माली आ पहुँचा। अन्य साथी भागने में सफल हो गए, लेकिन सबसे छोटा और कमज़ोर होने के कारण एक बालक भाग न पाया। माली ने उसे धर दबोचा।

नन्हे बालक ने धीमे स्वर में माली से कहा - "मेरे पिता नहीं हैं शायद इसलिए आप मुझे पीट रहे हैं!"

बालक की बात सुनकर माली का क्रोध जाता रहा। वह प्यार से समझाते हुए बोला - "बेटा, पिता के न होने पर तो तुम्हारी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।"

यह सुनकर बालक बिलख-बिलख कर रो पड़ा। माली की यह बात उस बालक के दिल में घर कर गई और उसने जीवनपर्यन्त नहीं भुलाया।

जानते हैं माली की सीख को गांठ बांध लेने वाला यह बच्चा कौन था? भारत का सबसे ईमानदार लाल - प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री।

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