बुढ़िया चला रही थी चक्कीपूरे साठ वर्ष की पक्की।...
कभी कभी मन में आता हैक्यों माँ दीदी को ही कहतीसाग बनाओ, रोटी पोओ ?...
गुल्ली डंडा और कबड्डी,चोर-सिपाही आँख मिचौली। कुश्ती करना, दौड़ लगानाहै अपना आमोद पुराना। ...