जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।
बच्चों की कविताएं
यहाँ आप पाएँगे बच्चों के लिए लिखा बाल काव्य जिसमें छोटी बाल कविताएं, बाल गीत, बाल गान सम्मिलित हैं।

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बुढ़िया - पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी

बुढ़िया चला रही थी चक्की
पूरे साठ वर्ष की पक्की।
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मैं पढ़ता दीदी भी पढ़ती | बाल कविता - दिविक रमेश

कभी कभी मन में आता है
क्यों माँ दीदी को ही कहती
साग बनाओ, रोटी पोओ ?
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खेल हमारे - डा. राणा प्रताप सिंह गन्नौरी 'राणा'

गुल्ली डंडा और कबड्डी,
चोर-सिपाही आँख  मिचौली।  
कुश्ती करना, दौड़ लगाना
है अपना आमोद पुराना। 
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