शेखचिल्ली जवान हो चला तो एक दिन माँ ने कहा—'मियां कुछ काम-धंधा करने की सोचो!'
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शेखचिल्ली जवान हो चला तो एक दिन माँ ने कहा—'मियां कुछ काम-धंधा करने की सोचो!'
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अपनी अपनी ले सौगातें
आओ महीनों आओ घर।
दूर दूर से मत ललचाओ
आओ महीनों आओ घर।
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अच्छी लगती हमें जनवरी
नया वर्ष लेकर है आती।
ज़रा बताओ हमें फरवरी
कैसे इतने फूल खिलाती।
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किसी जंगल में एक वृक्ष पर घोंसला बनाकर एक चिड़ा व चिड़िया का जोड़ा रहता था। चिड़िया ने अंडे दिये तो वह उसे सेह रही थी। इसी बीच धूप से परेशान एक मदमस्त हाथी उस वृक्ष की छाव में आ गया। अपने चंचल स्वभाव के कारण उसने पास की शाखा को तोड़ डाला। शाखा टूटते ही चिड़ियाँ के सभी अंडे टूट गए। घोसले का नामोनिशान नहीं रहा। असहाय चिड़िया विलाप करने लगी। चिड़िया को इस तरह दु:खी देखकर उसके साथी कठफोड़वा ने समझाते हुए कहा-- बुद्धिमान लोग विपत्ति के समय रोते-बिलखते नहीं, बल्कि धैर्य से काम लेते हैं।
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सुबह का समय था। उपवन में रंग-बिरंगे फूल खिले थे। फूलों की सुगंध आ रही थी। पक्षी चहचहा रहे थे।
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पौधा तो जामुन का ही था
लेकिन आये आम
पर जब खाया, तब यह पाया
ये तो है बादाम
जब उनको बोया ज़मीन में
पैदा हुए अनार
पकने पर हो गये संतरे
मैंने खाए चार।
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अगर हाथ देंगे नाली में, माँ मारेंगी ।
अगर साथ देंगे गाली में माँ मारेंगी ॥
कपड़े मैले नहीं करेंगे, माँ मारेंगी ।
मिट्टी सर में नहीं भरेंगे, माँ मारेंगी ।
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