यदि पक्षपात की दृष्टि से न देखा जाये तो उर्दू भी हिंदी का ही एक रूप है। - शिवनंदन सहाय।
साक्षात्कार
साक्षात्कार के अंतर्गत हम विभिन्न लोगों से बातचीत करेंगे और उन्हें आप तक पहुँचाएंगे।

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डॉ रुचि चतुर्वेदी से डॉ विष्णु सक्सेना की बातचीत - डॉ विष्णु सक्सेना

हिन्दी कविता का मंच हो और उस पर गणित की एक व्याख्याता खड़ी होकर अपने काव्य पाठ से लोगों को मंत्रमुग्ध कर रही है तो आश्चर्य होता है। इस मंच की खूबसूरती तब और बढ़ जाती है जब वह भारतीय परिधान (साड़ी) में पूरे संस्कार के साथ काव्य पाठ कर रही होती हैं। श्रोताओं की भीड़ और रह रहकर तालियों की गूंज बताती है कि उस कवियित्री के कितने प्रशंसक हैं। गणित की व्याख्याता से काव्य सुनते हैं तो प्रेम के कवि डॉक्टर विष्णु सक्सेना जी की एक कविता याद आती है, जिसमें वे गणित का जिक्र करते हुए कहते हैं... एक हैं अंक हम, एक हो अंक तुम / आओ दोनों को यूं जोड़ दें। सौभाग्य से ऐसा ही हुआ। मेरी निहारिका के लिए कवियित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी से बातचीत की प्रेम के कवि डॉक्टर विष्णु सक्सेना ने। डॉक्टर सक्सेना "मेरी निहारिका" के संरक्षक भी हैं। हम पाठकों के लिए यहां प्रस्तुत कर रहे हैं, दो सितारों की आपस में हुई बातचीत के प्रमुख अंश:
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