अपने घर में बना मेहमान जो बाशिन्दा है,
मुक्त आकाश का वो परकटा परिन्दा है।
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अपने घर में बना मेहमान जो बाशिन्दा है,
मुक्त आकाश का वो परकटा परिन्दा है।
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लोगों का मशवरा है कि मैं घर खरीद लूं,
उन्हें मालूम नहीं पहले मुक़द्दर खरीद लूं।
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आज कहना है हमारा उन अमीरों के लिए।
हाथ लोहे के बने क्या दिल टटोला आपने॥
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ज़िंदगी तुझ को जिया है कोई अफ़्सोस नहीं
ज़हर ख़ुद मैं ने पिया है कोई अफ़्सोस नहीं
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दीवारों-दर थे, छत थी वो अच्छा मकान था
दो-चार तीलियों पर कितना गुमान था
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