कवियों की पंक्तियां, श्रोताओं की फब्तियां :
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सरल है बहुत चाँद सा मुख छुपाना,
मगर चाँद सिर का छुपाना कठिन है।
अगर नौकरी या कि धंधा मिला हो,
कि पहना हुआ सूट बढ़िया सिला हो,
सरल है बहुत ब्याह करना किसी से,
मगर ब्याह करके निभाना कठिन है।
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हाँ! यह कैसी लाचारी
भेड़ है जनता बेचारी
सहना इसकी आदत है--
मुड़ती वहाँ, जहाँ जाती!
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