भाषा का निर्माण सेक्रेटरियट में नहीं होता, भाषा गढ़ी जाती है जनता की जिह्वा पर। - रामवृक्ष बेनीपुरी।

बोध कथाएं

बोध-कथाओं में कोई न कोई नैतिक शिक्षा अवश्य निहित रहती है और आप एक क्षण के लिए सोचने को बाध्य हो जाते हैं। यहाँ हम भारत-दर्शन के पाठकों के लिए बोध कथाएं संकलित कर रहे हैं। इन छोटी-छोटी कथा-कहानियों में परबत-सी ऊंची बातें और सागर-सी गहनता होती है निसंदेह यह कथाएं आपको पठनीय व रुचिकर लगेंगी। नैतिक सीख देती, बोध कथाओं का यह संकलन आपको भेंट।

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कलश का उत्तर

- भारत-दर्शन संकलन

पानी से भरा कलश सजा हुआ था। उस पर चित्रकारी भी की गई थी। कलश पर एक कटोरी रखी थी, जिससे उसे ढक कर रखा गया था। कटोरी ने कलश से कहा-"भाई कलश। तुम बड़े उदार हो। तुम सदा दूसरों को देते ही रहते हो। कोई भी खाली बरतन आए, तुम उससे अपना जल उड़ेल देते हो। किसी को खाली नहीं जाने देते।"
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