नारि सोइ बड़भागिनी, जाके पीतम पास।
लषि लषि चष सीतल करै, हीतल लहै हुलास ॥ १ ॥
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कबीर, रहीम, बिहारी, उदयभानु हंस, डा मानव के दोहों का संकलन।
नारि सोइ बड़भागिनी, जाके पीतम पास।
लषि लषि चष सीतल करै, हीतल लहै हुलास ॥ १ ॥
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नव पल्लव इठलात हैं हर्ष न हिये समात।
हिल-डुल न्यौता देत हैं मौसम की क्या बात॥
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