देखो भाई बरखा बहार
लेकर आई बूंदों की फुहार
रिमझिम-रिमझिम झड़ी लगाई
धरती कैसी है मुसकाई
लहराते पत्ते-पत्ते पर
हरियाली इसने बिखराई
ऋतुओं ने किया शृंगार
देखो आई बरखा बहार
झूम उठा मौसम चित्तचोर
नाच उठा जंगल में मोर
चमचम-चमचम बिजली बरसे
रिमझिम-रिमझिम बादल बरसे
...