जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।
व्यंग्य
हिंदी व्यंग्य. Hindi Satire.

Articles Under this Category

महाकवि की पुरस्कार वापसी  - राजेशकुमार

महाकवि चर्चा में रहते हैं, मतलब जिसमें भी रहते हैं, उसे भी चर्चा कहते हैं। वे अपने खुद के लिए और अपनी रचनाओं के लिए खुद ही बहुचर्चित, लोकप्रिय, सुपरिचित, विख्यात, अतिसक्रिय, जैसे शब्दों का खुल्लम-खुल्ला इस्तेमाल करते रहते हैं, और इस दृष्टि से उन्हें आत्मनिर्भर ही कहा जाएगा, और क्या? 
...

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें