जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।
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देश पर मिटने वाले शहीदों की याद में - संपादक, भारत-दर्शन

स्वतंत्रता-दिवस के अवसर पर आप सभी को शुभ-कामनाएं।
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न्यूज़ीलैंड की भारतीय पत्रकारिता - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

Bharat-Darshan 1996
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आत्मकथ्य : बालेश्वर अग्रवाल - बालेश्वर अग्रवाल

जीवन के नब्बे वर्ष पूरे हो रहे हैं आज जब मैं यह सोच रहा हूँ, तो ध्यान में राष्ट्रकवि स्व. श्री माखन लाल चतुर्वेदी की प्रसिद्ध कविता 'पुष्प की अभिलाषा' की पक्तियां याद आ रही है।
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महाकवि की पुरस्कार वापसी  - राजेशकुमार

महाकवि चर्चा में रहते हैं, मतलब जिसमें भी रहते हैं, उसे भी चर्चा कहते हैं। वे अपने खुद के लिए और अपनी रचनाओं के लिए खुद ही बहुचर्चित, लोकप्रिय, सुपरिचित, विख्यात, अतिसक्रिय, जैसे शब्दों का खुल्लम-खुल्ला इस्तेमाल करते रहते हैं, और इस दृष्टि से उन्हें आत्मनिर्भर ही कहा जाएगा, और क्या? 
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सुनाएँ ग़म की किसे कहानी - अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ

सुनाएँ ग़म की किसे कहानी हमें तो अपने सता रहे हैं।
हमेशा सुबहो-शाम दिल पर सितम के खंजर चला रहे हैं।।
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