धूप से छाँव की कहानी लिख
आह से आँसुओं की बानी लिख
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मेरे इस दिल में क्या है क्या नहीं है
अभी तक मैंने ये सोचा नहीं है
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लोग उस बस्ती के यारो, इस कदर मोहताज थे
थी ज़ुबां ख़ुद की मगर, मांगे हुए अल्फ़ाज़ थे
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कलम इतनी घिसो
कलम इतनी घिसो, पुर तेज़, उस पर धार आ जाए
करो हमला, कि शायद होश में, सरकार आ जाए
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टूट कर बिखरे हुए इंसान कहां जाएंगे
दूर तक सन्नाटा है नादान कहां जाएंगे
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