भोपाल में आयोजित 10वां विश्व हिंदी सम्मेलन (सितंबर 10-12, 2015)
कवि प्रदीप को उनके जीवित रहते चाहे साहित्यजगत में वह स्थान नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे लेकिन भोपाल में सुसज्जित उनके चित्र प्रमाणित करते हैं कि वे जनता के दिल में अपना विशेष स्थान रखते हैं।
दसवें विश्व हिंदी सम्मेलन में प्रेमचंद के चित्र निसंदेह भोपाल को हिंदीमय बना रहे थे।
भोपाल की सड़को पर सुसज्जित हिंदी के साहित्यकारों के चित्रों में मलिक मोहम्मद जायसी का चित्र।