हिंदी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है। - शंकरराव कप्पीकेरी

उन्हें आज ...

उन्हें आज आई है कैसी जवानी,
सभी कह रहे हैं उन्हीं की कहानी ।

लचकदार कानून उनके नहीं है,
बनी है यह जेबी घड़ीकी कमानी ।

नहीं दूध पीने को मिलता अगर हो,
तो कल का तो मिलता है पीने को पानी ।

सभी कुछ निछावर किया उनपे मैंने,
उन्होंने जो तारीफ मेरी बखानी ।

हुए छेद हैं फेफड़े में हजारों,
यही है मुहब्बत की ‘बेढब' निशानी।

- ‘बेढब' बनारसी

 

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