हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्र निर्माण का प्रश्न है। - बाबूराम सक्सेना

शैतान धोका दे रहा... | ग़ज़ल

शैतान धोका दे रहा इंसान बन के अब
कुछ लोग जी रहे यहाँ शैतान बन के अब

जाहिल थे जो जमाने में हुक्काम हो गए
क़ाबिल को जीना पड़ रहा दरबान बन के अब

अज्ञानी ज्ञान दे रहा कैसा ये दौर है
जनता बिचारी सुन रही नादान बन के अब

पहले फ़क़ीर संत होते थे अच्छे लोग
झूठे हैं जो वो ठग रहे भगवान बन के अब

कल तक ज़मीन पर थे जो वो आज उड़ रहे
मिलते हैं जब कभी भी तो अनजान बन के अब

नफ़रत मिटा के बाँट रहे प्यार अच्छे लोग
जो फ़ितरती हैं जी रहे हैवान बन के अब

उस घर का हाल देख के हैरत में है निज़ाम
क़ातिल भी आ रहा जहाॅं मेहमान बनके अब

-निज़ाम फतेहपुरी 
 ग्राम व पोस्ट मदोकीपुर
 ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) भारत 

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