राष्ट्रभाषा हिंदी का किसी क्षेत्रीय भाषा से कोई संघर्ष नहीं है।' - अनंत गोपाल शेवड़े

नादानी

आज करेंगे हम नादानी
मौसम भी है पानी पानी
चली हवा मादक अलबेली
कलियों से करती अठखेली
चन्दन का वन महक उठा है
गमक उठी है रात सुहानी
आज करेंगे …

चंचल है नदिया की धारा
टूट चुका है आज किनारा
खुला निमंत्रण देती हमको
लहरों की अलमस्त रवानी
आज करेंगे हम नादानी
आज करेंगे हम नादानी

- डॉ. ऋषिपाल भारद्धाज
ई-मेल: rishipal1631972@gmail.com

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