राष्ट्रभाषा हिंदी का किसी क्षेत्रीय भाषा से कोई संघर्ष नहीं है।' - अनंत गोपाल शेवड़े

झाँसी की रानी

लेकर स्वतन्त्रता के ध्वज को
निर्भय फहरानेवाली थी ।
रणचण्डी के क्रोधानल-सम
बनकर लहरानेवाली थी ॥

वह राज-योग की भस्म लगा
नित अलख जगानेवाली थी ।
रणभेरी के रस में स्वर भर
वह वीर बनानेवाली थी ॥

"तुम जगो वीर बुन्देलखण्ड'
यह मन्त्र फूंकनेवाली थी ।
निज मातृ-भूमि के अर्चन में
वह नहीं चूकनेवाली थी ॥

निद्रित झाँसी के कण-कण में
नव शक्ति जगानेवाली थी ।
इस वीर - भूमि की पूजा में
सर्वस्त्र चढ़ानेवाली थी ॥

वह महामृत्यु बनकर अरि के
सिर पर मँडरानेवाली थी ।
जीवन पी-पीकर अरि-कुल को
हर-लोक पठाने वाली थी ॥

- श्यामनारायण प्रसाद

 

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