वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

सच्चाई

 (काव्य) 
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रचनाकार:

 गोरख पाण्डेय

मेहनत से मिलती है
छिपाई जाती है स्वार्थ से
फिर, मेहनत से मिलती है

-गोरख पाण्डेय

 

 

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