हिंदी को तुरंत शिक्षा का माध्यम बनाइये। - बेरिस कल्यएव

कह मुकरियाँ (काव्य)

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Author: स्मिता श्रीवास्तव

बगिया में है एकछत्र राज
इत्र की दुनिया का सरताज
गुलदस्ते में अलग रुआब
क्या सखि साजन न सखि गुलाब

नदिया में वह सैर कराये
वर्षा हो तो खूब इतराये 
जिधर का रुख हो उधर बहाव
क्या सखि साजन न सखि  नाव 

प्राणी जगत ताप से व्याकुल
हर पल गर्मी करती आकुल
तपते तन मन का रखे ख्याल
क्या सखि साजन न सखि तरणताल 

-स्मिता श्रीवास्तव
 भारत

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