भाषा विचार की पोशाक है। - डॉ. जानसन।

पैरोडी (काव्य)

Print this

Author: कवि चोंच

[रसखान के एक छंद की ‘पैरोडी' ]

मानुष हौं तौ वहै कवि 'चोंच'
बसौ सिटी लंदन के किसी द्वारे।
जौ पशु हौं तौ बनों बुलडॉग
चलौं चढ़ि ‘कार' में पूछ निकारे।
पाहन हौं तौ थिएटर हॉल कौ
बैठें जहाँ ‘मिस' पाँव पसारे।
जो खग हौं तो बसेरो करौ
चढि 'ओक' पै 'टेम्स' नदी के किनारे।

- कवि चोंच

 

Back

 
Post Comment
 
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें