अपनी सरलता के कारण हिंदी प्रवासी भाइयों की स्वत: राष्ट्रभाषा हो गई। - भवानीदयाल संन्यासी।
हमने कोशिश करके देखी | ग़ज़ल (काव्य)  Click to print this content  
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'

हमने कोशिश करके देखी पत्थर को पिघलाने की
पत्थर कभी नहीं पिघले अब मानी बात जमाने की।

हमने कोशिश करके देखी दुश्मन यार बनाने की
दुश्मन कभी ना यार बने ये बात है सोलह आने की।

उनको भी तो आदत नाही दिल का दर्द बताने की
हमको भी आदत ना नाहक अपनापन जतलाने की ।

अपना तो है दर्द से रिश्ता भूख-गरीबी से यारी
हमने भूखों जीना सीखा आदत ना हाथ फैलाने की ।

हर मानव दुखियारा जग में कोई खुशी नही दिखता
फिर हम क्यों कोशिश भी करते अपना दर्द बताने

मिलते ही वो शुरू हो गए अपने दर्द बताने को
मेरी तो बारी ना आई अपनी बात सुनाने की ।

शायद वो मेरा हो जाता जो मैं दिल की कह पाता
होती बात है यूं क्या 'रोहित' दिल अपना समझाने की।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

Posted By rajat pandey    on Monday, 23-Nov-2015-16:39
 
बहुत खूब.
 
 
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