साहित्य का स्रोत जनता का जीवन है। - गणेशशंकर विद्यार्थी।

गद्य-काव्य

गद्य-काव्य: वह गद्य जिसमें कुछ भाव या भावनाएँ ऐसी कवित्वपूर्ण सुन्दरता से अभिव्यक्त की गईं हों कि उसमें काव्य की सी संवेदनशीलता तथा सरसता आ जाए, उसे गद्य-काव्य कहा जाता है।

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साधना | गद्य काव्य - वियोगी हरि

अब वे हँसते हुए फूल कहाँ! अपने रूप और यौवन को प्रेम की भट्टी पर गलाकर न जाने कहाँ चले गये। अब तो यह इत्र है। इसी में उनकी तपस्या का सिद्धरस है। इसी के सौरभ में अब उनकी पुण्यस्मृति
का प्रमाण है। विलासियो! इसी इत्र को सूँघ-सूँघकर अब उन खिले फूलों की याद किया करो।

 

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