देश तथा जाति का उपकार उसके बालक तभी कर सकते हैं, जब उन्हें उनकी भाषा द्वारा शिक्षा मिली हो। - पं. गिरधर शर्मा।
 
उसे कुछ मिला, नहीं ! (काव्य)       
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

कूड़े के ढेर से
कुछ चुनते हुए बच्चे को देख
एक चित्रकार ने
करूणामय चित्र बना डाला।

कवि ने
एक मार्मिक रचना
रच डाली।

एक कहानीकार ने
'उसी बच्चे' पर
कालजयी
कहानी कही।


जनता ने
प्रदर्शनी में चित्र,
मंच पर कविता,
और
पत्रिका में छपी
कहानी को ख़ूब सराहा।

पर उस बच्चे ने चित्र, कविता और कहानी से क्या पाया?

वो अब भी लगा है...
वहीं कूड़े के ढेर से कुछ खोजने में ।
उसे कुछ मिला, नहीं !!!

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

Back
 
 
Post Comment
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश