देश तथा जाति का उपकार उसके बालक तभी कर सकते हैं, जब उन्हें उनकी भाषा द्वारा शिक्षा मिली हो। - पं. गिरधर शर्मा।
 
दो विद्वान (कथा-कहानी)       
Author:खलील जिब्रान

एक बार एक प्राचीन नगर में दो विद्वान रहते थे। दोनों बड़े विद्वान थे लेकिन दोनों के बीच बड़ा मनमुटाव था। वे एक-दूसरे के ज्ञान को कमतर आँकने में लगे रहते।  

उनमें से एक नास्तिक और दूसरा आस्तिक था।

एक दिन दोनों बाजार में मिले। दोनों अपने अनुयायियों के साथ थे और वे सब ईश्वर के अस्तित्व को लेकर एक वाद-विवाद में उलझ गए। घंटों मशक्कत के बाद दोनों अलग हो गए।

उसी शाम नास्तिक मंदिर गया और वेदी के सामने नतमस्तक होकर प्रार्थना करने लगा कि ईश्वर उसके हठीले अतीत के लिए उसे क्षमा करे।

और उसी घड़ी आस्तिक विद्वान ने,  अपनी पवित्र पुस्तकों को जला दिया।  उसकी आस्था डगमगा चुकी थी।

-ख़लील जिब्रान 
भावानुवाद : रोहित कुमार 'हैप्पी'
[ The Two Learned Men] 

Back
 
 
Post Comment
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश