कैसे निज सोये भाग को कोई सकता है जगा, जो निज भाषा-अनुराग का अंकुर नहिं उर में उगा। - हरिऔध।
 
बापू  (काव्य)       
Author:डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड | न्यूज़ीलैंड

विश्व को हिंसा से
मुक्त कराने का बीड़ा उठाया था तुमने।
विश्व तो क्या
यहां तो घर में भी
शांति निवास के लाले पड़ गए हैं।
अब तो घरेलू हिंसा दिन ब दिन
बढ़ने लगी है।

तुमने कहा था
अपनी इन्द्रियों को वश में करना सीखो।
तुमने स्वयं ऐसा करके
एक उदाहरण भी पेश किया।

गलतियां तो सभी से होती हैं
तुमसे भी हुई थी।
फ़र्क सिर्फ इतना है
कि
तुम उन्हें कबूल कर
विश्वास और दृढ़ता से आगे बढ़ते रहे।

तुम्हारा यह विश्वास और दृढ़ता तो
हमें भी विरासत विरासत में मिली थी।
फिर यह अचानक क्या हो गया।
दूसरों पर विश्वास करना तो दूर की बात है
यहां तो खुद पर ही विश्वास करने की हिम्मत
टूट सी गई है।

ब्रह्मचर्य और इन्द्रियों पर
नियंत्रण के आपके आदेश का अर्थ ही बेमाने हो गया है।
स्त्रियों को तो छोड़िए
इन मानुष रुपी भेड़ियों ने
निरीह, मासूम बच्चियों का बलात्कार करके
अपनी ताकत और पौरुष को
प्रकट करना शुरू कर दिया है।

मुझे गलत मत समझना बापू
मैं आपसे कोई शिकायत नहीं कर रही
खासकर आज आपके जन्मदिवस पर।
पर करुं भी तो क्या करुं।
आपकी और मेरी मातृभूमि पर जो हो रहा है
उसे देखकर चुप भी तो नहीं रहा जाता।

लगता है देश की अंतरात्मा, न्याय, भलाई और निष्पक्षता
पूरी तरह से पलायन कर चुके हैं।
देश के रखवाले बिक चुके हैं
राजनीति भ्रष्टाचार का एक अखाड़ा
बन कर रह गई है।

इस साल फिर हम हर साल की तरह
जोर-शोर से तुम्हारा जन्मदिन मनायेंगे।
छोटे बड़े सभी नेता
बड़े बड़े वायदे करेंगे।
देश को आगे बढ़ाने के स्वप्न महल बनायेंगे।
जाति-पाति के भेदभाव को
जड़ से उखाड़ डालने का
बीड़ा उठाने की होड़ फिर से लगेगी।

बस आपसे एक विनम्र आवेदन है
अपनी मातृभूमि पर फिर से पैर रखने के अपने इरादे को
समय रहते बदल लें तो ही अच्छा रहेगा।
हमें तो यह सब देख कर अनदेखा करने की आदत सी पड़ चुकी है
पर आपसे यह सब सहन न हो पायेगा।

अगर हो सके तो ऊपर से दुआ दे देना
शायद आपकी दुआ का कुछ असर हो जाये
इस पल-पल बिखरते समाज पर
भेड़ियों की खाल में छिपे इंसानों पर
नैतिक मूल्यों से विहीन नेताओं पर
धर्म के ठेकेदारों पर
और
रक्षक का बाना पहन
भक्षक का व्यवहार करने वाले
मनुष्यों पर।

आपसे फिर से आपके अगले जन्मदिवस पर
अपने दुख और निराशाओं को बांटने को आतुर

आपकी ही अपनी
निर्भय बनने की आस लिए एक मासूम बालिका

-डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड

 

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