कैसे निज सोये भाग को कोई सकता है जगा, जो निज भाषा-अनुराग का अंकुर नहिं उर में उगा। - हरिऔध।
 
कवि  (काव्य)       
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

तुम्हारी कलम में
वो 'पीर' नहीं।
तुमने शब्द गढ़े,
जीये नहीं।
तुम कवि तो हुए
कबीर नहीं!

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

 

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