विदेशी भाषा में शिक्षा होने के कारण हमारी बुद्धि भी विदेशी हो गई है। - माधवराव सप्रे।
 
राखी बांधत जसोदा मैया (काव्य)       
Author:सूरदास | Surdas

राखी बांधत जसोदा मैया।
विविध सिंगार किये पटभूषण, पुनि पुनि लेत बलैया॥
हाथन लीये थार मुदित मन, कुमकुम अक्षत मांझ धरैया।
तिलक करत आरती उतारत अति हरख हरख मन भैया॥
बदन चूमि चुचकारत अतिहि भरि भरि धरे पकवान मिठैया।
नाना भांत भोग आगे धर, कहत लेहु दोउ मैया॥
नरनारी सब आय मिली तहां निरखत नंद ललैया।
सूरदास गिरिधर चिर जीयो गोकुल बजत बधैया ॥

-सूरदास

 

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