देश तथा जाति का उपकार उसके बालक तभी कर सकते हैं, जब उन्हें उनकी भाषा द्वारा शिक्षा मिली हो। - पं. गिरधर शर्मा।
 
तर्ज़ बदलिए (काव्य)       
Author:कृष्णा सोबती

गुमशुदा घोड़े पर सवार
हमारी सरकारें
नागरिकों की तानाशाही से
लामबंदी क्यूं करती हैं
और दौलतमंदों की
सलामबंदी क्यूं करती हैं
सरकारें क्यूं भूल जाती हैं
कि हमारा राष्ट्र एक लोकतंत्र है
और यहां का नागरिक
गुलाम दास नहीं
वो लोकतांत्रिक राष्ट्र
भारत महादेश का
स्वाभिमानी नागरिक है
सियासत की यह
तर्ज़ बदलिए।

- कृष्णा सोबती

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