हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।

हाइकु

हाइकु

इस श्रेणी के अंतर्गत

डॉ भावना कुँअर के हाइकु

- भावना कुँअर | ऑस्ट्रेलिया

अकेला बीज
धरती से मिलके 
फूटा खिलके।
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हाइकु 

- अभिषेक

रास्ते में बचे
झुलस गये पिता
घर में आ के
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