यदि पक्षपात की दृष्टि से न देखा जाये तो उर्दू भी हिंदी का ही एक रूप है। - शिवनंदन सहाय।
बच्चों की कविताएं
यहाँ आप पाएँगे बच्चों के लिए लिखा बाल काव्य जिसमें छोटी बाल कविताएं, बाल गीत, बाल गान सम्मिलित हैं।

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साखियाँ - कबीर

जाति न पूछो साध की, पूछ लीजिए ज्ञान।
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान ।।1।।

आवत गारी एक है, उलटत होइ अनेक।
कह कबीर नहिं उलटिए, वही एक की एक ।।2।।

माला तो कर में फिरै, जीभि फिरै मुख माँहि।
मनुवाँ तो दहुँ दिसि फिरै, यह तौ सुमिरन नाहिं ।।3।।

कबीर घास न नींदिए, जो पाऊँ तलि होइ।
उड़ि पड़ै जब आँखि मैं, खरी दुहेली होइ ।।4।।

जग में बैरी कोइ नहीं, जो मन सीतल होय।
या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय ।।5।।

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आरी नींद...| लोरी - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' | Ayodhya Singh Upadhyaya Hariaudh

आरी नींद लाल को आजा।
उसको करके प्यार सुलाजा॥
तुझे लाल है ललक बुलाते।
अपनी आँखों पर बिठलाते॥
तेरे लिये बिछाई पलकें।
बढ़ती ही जाती हैं ललकें॥
क्यों तू है इतनी इठलाती।
आ आ मैं हूँ तुझे बुलाती॥
गोद नींद की है अति प्यारी।
फूलों से है सजी संवारी॥
उसमें बहुत नरम मन भाई।
रुई की है पहल जमाई॥
बिछे बिछौने हैं मखमल के।
बड़े मुलायम सुन्दर हलके॥
जो तू चाह लाल उसकी कर।
तो तू सोजा आँख मूंद कर॥
मीठी नींदों प्यारे सोना।
सोने की पुतली मत खोना॥
उसकी करतूतों के ही बल।
ठीक ठीक चलती है तन कल॥
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मामा आए, मामा आए | शिशु कविता - अमरनाथ

मामा आए, मामा आए
मामा आए, क्या क्या लाए

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ऐसे सूरज आता है - श्रीप्रसाद

पूरब का दरवाज़ा खोल
धीरे-धीरे सूरज गोल
लाल रंग बिखरता है
ऐसे सूरज आता है।
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हमें खेलने जाने दो  - शिव मृदुल

मम्मी-पापा! रोको मत,
बाहर जाते टोको मत।
उम्र खेलने जाने की,
दूध-दही, घी खाने की।
खाया-पिया पचाने दो,
हमें खेलने जाने दो।
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